केवल इन 3 तरीकों से हम अपनी बात भगवान् तक पंहुचा सकते हैं

किसी भी महान साम्राज्य का राजा भी अपनी मनोकामना की पूर्ति नहीं कर सकता
सम्राट होने के नाते वह अपनी मन की मौज़ से व्यव्हार नहीं कर सकता
उनके लिए भी आचरण और अनुसासन होता है
जिस प्रकार इस संसार में किसी भी शासक के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियम होते है
उसी प्रकार इस सम्पूर्ण जगत के नियता और अधिपति को भी इस सृष्टि को चलने के लिए नियमो का पालन करना पड़ता है
यह कहना की भगवान् तो सबकुछ अपने आप ही कर लेंगे क्योंकि वह सर्व शक्तिमान हैं
ये बच्चों की नासमझी जैसी बात होगी
एक छोटा सा उदहारण ले लेते है
दो व्यक्ति भगवन के भक्त हैं
जिसमे से एक भगवान् से वर्षा की प्राथना करता हैं ताकि उसकी फसल न सूखे
दूसरा भगवान् से वर्षा न होने की प्राथना करता है ताकि उसकी घर की शादी अच्छे से हो जाये
ऐसे में भगवान् किसकी सुनेगा यह एक बड़ा प्रश्न है
जिस प्रकार एक देश को चलने के लिए प्रधान मंत्री और अन्य मत्रियों की अव्सय्कता होती है
उसी प्रकार भगवान् ने भी अलग अलग कार्यों के लिए अलग अलग देवताओं को रखा है
लेकिन हम बात कर रहे हैं अपनी बात सीधे उस शक्ति के पास पहुंचने की तो इसके लिए आवस्य्क्ता है
निष्काम कर्म ,असीमित प्रेम , और विशुद्ध ह्रदय की
केवल इसी के माध्यम से आप अपनी बात सीधे भगवान् तक पंहुचा सकते हैं

 

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